Cricket Bat | क्रिकेट का बल्ला (Cricket Bat) क्रिकेट का बल्ला | क्रिकेट बैट से जुड़ी ये अहम बातें आपको नही पता होगी

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 दोस्तों दुनिया में बहुत सारे गेम्स पाए जाते हैं जिन्हें लोग काफी आनंद के साथ अपने-अपने क्षेत्रों में खेलते हैं। इन सभी खेलों में से कुछ खेलो को खेलने के लिए कुछ विशेष प्रकार के उपकरण, नियम, तथा स्थान की आवश्यकता होती है। क्रिकेट भी उन्हीं लोकप्रिय गेम्स में से एक है जिसे खेलने के लिए कुछ खास उपकरणों की जरूरत होती है। इनमें बैट,बॉल,स्टम्प गिल्ली, हेल्मेट, ग्लव्स आदि उल्लेखनीय है। ये उपकरण एक निश्चित नाप- जोख के बने होते हैं। 


क्रिकेट के रीढ़ की हड्डी:

क्रिकेट खेल में बैट एक बहुत ही महत्वपूर्ण उपकरण है जिसके बिना क्रिकेट मैच खेला ही नही जा सकता है। एक तरह से हम कह सकते हैं कि बैट क्रिकेट मैच के रीढ़ की हड्डी है। भले ही आपके पास स्टेडियम में क्रिकेट स्पोर्ट्स के सभी आवश्यक उपकरण तथा सामाग्रियां हों लेकिन उनमें से अगर बैट आपके पास नही है तो मैच संपन्न नही हो सकता है। बैट क्रिकेट की मूलभूत सामाग्री है। बैट एक अंग्रेजी शब्द है इसे हिन्दी में बल्ला कहते हैं और इसकी सहायता से खेलने वाले खिलाड़ी को बल्लेबाज कहते हैं।

 

बल्ले का प्रयोग खिलाड़ी मुख्यत: दो कामों के लिए करता है पहला बॉल को हिट करने के लिए तथा दूसरा मैच के दौरान दौड़कर रन लेने के लिए। 




प्रिय पाठक बंधु, क्या आपको पता है कि जो बैट या बल्ला खिलाड़ी क्रिकेट स्टेडियम में मैच खेलते समय इस्तेमाल करता है वह एक विशेष प्रकार की लकड़ी का बना होता है। इस बल्ले का निर्माण करते समय कारीगर द्वारा कुछ निश्चित मापदंडों क पालन किया जाता है। इनके मापदंड का वर्णन   क्रिकेट के नियम  (The Laws of Cricket) नामक बुक में दिया गया है। The Laws of Cricket पुस्तक क्रिकेट संम्बंधी एक नियम संग्रह हैं। क्रिकेट से जुड़े शुरूआती नियमों का निर्माण एक अंतरराष्ट्रीय संस्था MCC (Marylebone Cricket Club) द्वारा किया गया। इसे हम इस प्रकार भी कह सकते हैं कि MCC ने क्रिकेट के प्रारंभिक मूलभूत नियमों व सिद्धांतो को बनाया। विभिन्न देशों में स्थापित क्रिकेट बोर्ड अपने खिलाड़ियों के बल्ले की माप की जांच करता है और उसके प्रयोग की अनुमति भी देता है। इंडिया में BCCI (Board of Control for Cricket in India) बल्ले के मानकों का परीक्षण करता है और उसके प्रयोग की अनुमति देता है।

 आइए हम जानें बैट से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें-



     बैट की संरचना: (Structure of Bats)-

     

क्रिकेट बैट का शुरुआती मॉडल

     प्रारंभ में क्रिकेट मैच में प्रयोग किए जाने वाले बैट का रूप वर्तमान हॉकी के जैसे था। लेकिन समय के साथ ही इसके बनावटी संरचना तथा रूप रेखा में काफी बदलाव हो गया। वर्तमान में प्रयोग किए जाने वाले बल्ले(Bat)की बनावट से जुड़ी जानकारी निम्नानुसार है:-

     बैट(Bat)  या बल्ला मुख्यत: दो भागों में बंटा होता है।

 1.हैण्डल (Handle)-

हैण्डल,बैट का ऊपरी भाग होता है।  इसके दो हिस्से होते हैं एक,निचला सिरा जो ब्लेड के साथ जुड़ा होता है। जब हैंडल का निचला सिरा ब्लेड के साथ जुड़ जाता है तो  वह ब्लेड का हिस्सा बन जाता है।  दूसरा,हैंडल का ऊपरी भाग जो बेलनाकार होता है। बैट के इसी बेलनाकार भाग को बैट का हैण्डल कहते हैं। हैंडल पर रबड़ की एक परत चढ़ी होती है जो बेलनाकार मुट्ठी से हाथों की पकड़ बनाने में सहायता करती है। बैट के हैंडल की लम्बाई बैट के कुल लंबाई (Total length) का लगभग 52% होता है।

हैंडल का प्रयोग बल्ले को पकड़ने के लिए किया जाता है।

क्रिकेट का बल्ला


2.ब्लेड (Blade)-

 बैट के हैण्डल को छोड़कर शेष भाग ब्लेड कहलाता है।क्रिकेट के बल्ले का ब्लेड लकड़ी का एक ब्लॉक होता है जो आमतौर पर स्ट्राइक करने वाली सतह पर चपटा( Flat) होता है और इसकी पिछली सतह (Back part)पर एक उभार(ridge) होता है।  ब्लेड में एक अग्रभाग(Face), पिछला भाग(a Back), निचला सिरा(aToe),बगल (Sides) और कंधे(Shoulders) होते हैं,। हैंडल का अग्र भाग समतल होता है जिसके तरफ से बॉल को हिट करते हैं। इसके विपरीत भाग को बैट का पिछला भाग कहते हैं। हैंडल कै दोनों तरफ एक एक कंधा होता है। ये हैंडल के प्रवेश बिंदु से लेकर वहां तक होता है जहां ब्लेड अपने अधिकतम चौड़ाई पर होता है। निचले भाग और कंधों के बीच में बैट के दोनों तरफ बगल(Sides) होते हैं। ब्लेड की लम्बाई लगभग 19 इंच होती है। ब्लेड की चौड़ाई 4.25 इंच/10.8cm

गहराई 2.64 इंच/6.7cm, सिरे(edges)की मोटाई 1.56 इंच/4cm होती है। 




बल्ले की माप  :(Measurement of Bat) 


क्रिकेट के बल्ले की एक निश्चित माप होती है। इसका वर्णन आपको क्रिकेट के नियम (The Laws of Cricket) बुक में नियम नं०6 में मिलेगा।बल्ले के आकार से संबंधित मानकों को ICC मान्यता प्रदान करता है। राष्ट्रीय तथा वैश्विक स्तर पर खेले जाने वाले मैचों में बल्लेबाजों द्वारा प्रयोग किए गए बैट को अंतरराष्ट्रीय मानक के अंतर्गत तैयार किया जाता है। ICC के अनुसार बैट(Bat)की कुल लम्बाई 38 inch होनी चाहिए। अतः क्रिकेट के बल्ले की लम्बाई 38 इंच या 96.5 से०मी० होती है। इसमें हैंडल तथा ब्लेड दोनों की लम्बाई शामिल है। बैट का हैंडल बैट के लम्बाई का लगभग 52% होता है अर्थात लगभग 19 inch या 49.5 cm होता है। बैट का वजन लगभग 1.2-1.4 कि०ग्रा० होता है।


बल्ले की लकड़ी:( Wood for Bats)


क्रिकेट बल्ले की एक विशेष बात यह होती है कि यह एक खास प्रकार की लकड़ी का बना होता है। क्रिकेट का बल्ला विलो की लकड़ी का बना होता है। विलो एक प्रकार का पेड़ है जो इंग्लैंड के ऐसेक्स इलाके में पाया जाता है।विलो का वैज्ञानिक नाम हैलिक्स एल्बा है। सबसे पहले इसका उपयोग 1624 में माना जाता है। भारत में विलो वृक्ष कश्मीर क्षेत्रों में मिलता है। विलो वृक्ष के लकड़ी की कुछ विशेषताएं हैं जैसे 

-यह बहुत शख्त या ठोस होती है।

-यह वज़न में हल्की होती है।

-इसमें तेज़ गति से आती हुई गेंद को हिट करने पर कोई निशान या क्षति नहीं पहुंचता और न ही ये आसानी से टूटती है।

-इसमें गेंद की चोट से गड्ढा नही होता।

-यह बहुत चिकनी होती है।

उपरोक्त गुणों के चलते विलो का प्रयोग बल्ला बनाने के लिए अच्छा माना जाता है। विलो की लकड़ी को आयताकार ब्लेड के रूप में काटकर इसे मशीन से दबाया जाता है जिससे यह ठोस बन जाए। इंडिया में बैट बनाने के लिए विलो वृक्ष की लकड़ी  के अतिरिक्त शीसम, सागवान आदि पेड़ों की लकड़ियां भी का प्रयोग भी किया जाता है।

अधिकतर बल्ले अब  मशीनों से बनाए जाते हैं। हाथ से बैट बनाने की कला को पोडशेविंग (Podshaving) कहते हैं।


बल्ले की मजबूती के तरीके:( Method to Strengthen bats


बल्ले के निर्माण,उपयोग आदि के साथ साथ इसके मरम्मत व रख रखाव के तरीके का उल्लेख भी  क्रिकेट के नियमों के संग्रह में नियम नं०6 के अंतर्गत मिलता है। क्रिकेट बल्ले को खरीदने पर उसे तुरंत ही उपयोग में नहीं लाया जाता है।

पहले उसे मजबूत और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जाता है। इसके लिए इस पर कच्चे अलसी के तेल की मालिश की जाती है। अलसी के तेल की मजबूत परत चढने से बल्ला काफी स्ट्रॉन्ग हो जाता है।


बल्ले की मरम्मत तथा रख रखाव:(, Repairing and Safety of Cricket Bat)


क्रिकेट बल्ले के ब्लेड के अग्र भाग (Face) , बगल (Sides(, पीछे का भाग (Back) या नीचे के भाग (Toe ) को किसी भी डैमेज से बचाने के लिए इस पर फेवीकोल (Fevicol) जैसे किसी Soft पदार्थ को लगाते हैं जो बैट पर लगाते समय या बैट पर लगाने के बाद कड़क नही होता हो।


बैट की सतह पर हुए गड्ढे या स्क्रैच को भरने के लिए केवल लकड़ी के पाउडर को ही गोंद के साथ मिक्स करके बनाएं गए मैटेरियल का प्रयोग किया जा सकता है।


 तो इस प्रकार उपरोक्त बातें क्रिकेट के बल्ले से जुड़ी हैं जिनकी जानकारी न केवल एक क्रिकेटर को होनी चाहिए बल्कि एक आम आदमी को भी ये चीजें पता होनी चाहिए।

उम्मीद है यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा क्रिकेट से जुड़े informative Article को पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट Crictox.com से जुड़े रहें।

धन्यवाद!

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